ख़ुशियों की पाती बनकर,
ख़ुशियाँ फैलाओ,
मस्त रहो
ख़ुशबू की मानिन्द बिखरकर, जग
महकाओ, मस्त रहो
आज के इस पावन अवसर पर यही दुआ करते हैं हम
सबके प्यारे, राज-दुलारे, मौज मनाओ, मस्त रहो
आँखों में आकाश रहे, अन्तर्मन
में कैलाश रहे
नदियों की कलकल के जैसा जीवन में उल्लास रहे
आज के इस पावन अवसर पर यही दुआ करते हैं हम
मौसम कोई भी हो लेकिन मुट्ठी में मधुमास रहे
धरती से अम्बर तक जैसे
इन्द्रधनुष की रंगत हो
लक्ष्मी के दरबार में जैसे सप्तसुरों की संगत हो
हर्षोल्लास, उमंग तुम्हारे, जीवन में ऐसे छा जाएँ
हरी दूब के ऊपर जैसे तुहिन-कणों की पंगत हो
आज के इस पावन अवसर पर यही दुआ करते हैं हम
सबके प्यारे, राज-दुलारे, मौज मनाओ, मस्त रहो
नदियों की कलकल के जैसा जीवन में उल्लास रहे
आज के इस पावन अवसर पर यही दुआ करते हैं हम
मौसम कोई भी हो लेकिन मुट्ठी में मधुमास रहे
लक्ष्मी के दरबार में जैसे सप्तसुरों की संगत हो
हर्षोल्लास, उमंग तुम्हारे, जीवन में ऐसे छा जाएँ
हरी दूब के ऊपर जैसे तुहिन-कणों की पंगत हो
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