नवगीत – दीपावली दीपावली दीपावली

 हर साल मेरी रूह को,
कर डालती है बावली ।
दीपावली दीपावली दीपावली ॥
 
असल में ये वजह है मुस्कुराने की ।
फलक से आँख उट्ठा कर मिलाने की ।
घरों को रोशनी से जगमगाने की ।
गले मिलने मिलाने की ।
वो हो मोहन, मिखाइल या कोई गुरबत अली ।
दीपावली दीपावली दीपावली ॥
 
हृदय-मिरदंग बजती है तिनक धिन धिन ।
छनकती है खुशी-पायल छनन छन छन ।
बमों का शोर होता है धना धन धन ।
निकलते हैं सभी बन ठन ।
लगे है स्वर्ग के जैसी शहर की हर गली ।
दीपावली दीपावली दीपावली ॥

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