कटते जा रहे हैं पेड़ पीढी दर
पीढी
बढता जा रहा है धुआँ सीढी दर
सीढी
अपने अस्तित्व की रक्षा के लिये,
चिन्तित है कागजी समुदाय
हावी होता जा रहा है कम्प्यूटर,
दिन ब दिन, फिर भी
समाप्त नहीं हुआ - महत्व,
कागज का अब तक
बावजूद इन्टरनेट के,
कागज आज भी प्रासंगिक है
नानी की चिठ्ठियों में,
दद्दू की वसीयत में
कागज ही होता है इस्तेमाल,
हर मोड पर जिन्दगी के
परन्तु अब थकने भी लगा है कागज
बिना वजह छपते छपते
कागज के अस्तितव के लिये
जितने जरूरी हैं
पेङ, पर्यावरण, आदि आदि,
उतना ही जरूरी है उसका
सदुपयोग
सकारण
अकारण नहीं
अपने अस्तित्व की रक्षा के लिये,
हावी होता जा रहा है कम्प्यूटर,
समाप्त नहीं हुआ - महत्व,
बावजूद इन्टरनेट के,
नानी की चिठ्ठियों में,
कागज ही होता है इस्तेमाल,
परन्तु अब थकने भी लगा है कागज
बिना वजह छपते छपते
कागज के अस्तितव के लिये
जितने जरूरी हैं
पेङ, पर्यावरण, आदि आदि,
सकारण
अकारण नहीं
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