गीत-नवगीत, सॉनेट, कविताएं, छन्द एवं मुक्तक आदि
नवगीत - चल चलें इक राह नूतन
चल चलें इक राह नूतन
भय न किंचित
हो जहाँ पर
पल्लवित सुख
हो निरंतर
अब लगाएँ
हम वहीँ पर
बन्धु - निज आसन
चल चलें इक राह नूतन
द्वेष - ईर्ष्या
को न प्रश्रय
दुर्गुणों की
हो पराजय
हो जहाँ बस
प्रेम की जय
खिल उठे तन मन
चल चलें इक राह नूतन
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment