गीत - पर्वों का पर्याय हिन्द है

 अगर ज़िन्दगी काया है तो उपटन हैं त्यौहार ।
शाश्वत जीवन दर्शन का अवगाहन हैं त्यौहार ॥
 
विकल ह्रदय में सम्बल जागे,
थका बदन भी सरपट भागे,
कैसा भी हो कोई निठल्ला,
त्यौहारों में 'हिल्ले' लागे,
निज रूचि के अनुसार सभी को देते हैं रुजगार ।
इसीलिये तो कहते हैं दुःख-भञ्जन हैं त्यौहार ।।
 
चौखट पर जब आते उत्सव,
खुशियों को बरसाते उत्सव,
नारी और गृहस्थी का,
औचित्य-सार समझाते उत्सव,
जीवन की खुशहाली का हैं यही सही आधार ।
जगतीतल में रिश्तों का अभिनन्दन हैं त्यौहार ॥
 
इनसे ही जीवन में रति है,
सदाचार-सौहार्द सुमति है,
इनके बिना स्थूल है जीवन,
ये हैं तो जीवन में गति है,
इनकी महिमा अद्भुत, अनुपम, अविचल, अपरम्पार ।
प्रगति-पन्थ-परिवृद्धि हेतु प्रोत्साहन हैं त्यौहार ॥
 
धर्मों का संकाय हिन्द है,
तत्वों का अभिप्राय हिन्द है
सुविचारों का प्रथम प्रणेता,
पर्वों का पर्याय हिन्द है,
विश्व गुरु का मान  तभी तो देता है सन्सार ।
मानव में मौजूद ईश का वन्दन हैं त्यौहार ॥

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