गीत - वो है भगवान इन्सान के रूप में

 एक शब्द अहसान है, एक शब्द उपकार ।
अहसाँ करते आदमी, प्रभू करें उपकार ॥
 
हर हृदय-कुञ्ज में जो महकता रहे,
वो है भगवान इन्सान के रूप में ।
जो बिना स्वार्थ खुशियाँ लुटाया करे,
वो है भगवान इन्सान के रूप में ॥
 
अपने माँ-बाप का, बीबी-औलाद का,
ध्यान रखते हैं सब, इसमें क्या है नया ।
रिश्ते-नातों से आगे जो सोचा करे,
वो है भगवान इन्सान के रूप में ॥
 
इस ज़माने का तो ये ही दस्तूर है,
काबिलों को गले से लगाते हैं लोग ।
हौसला हर किसी को जो बख़्शा करे,
वो है भगवान इन्सान के रूप में ॥
 
प्रेम, करुणा, दया, त्याग की सूई से,
आदमीयत के धागों में जो नित 'नवीन'
मुस्कुराहट के मोती पिरोता रहे,
वो है भगवान इन्सान के रूप में ॥

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