नवगीत - यमुना कहे पुकार

 यमुना कहे पुकार
बिना तुम्हारे नटवर नागर
कौन करे उद्धार
 
छोटे-मध्यम उद्यम, सबका -
दूषण यमुना में बहता
बाँध बना है जब से, तब से
पानी भी थम के रहता
पंक पटा है तट से तल तक
दूषित है जल धार
बिना तुम्हारे नटवर नागर
कौन करे उद्धार
 
पल-छिन दूभर होता जाता
जल के जीवों का जीवन
मन में श्रद्धा अतिशय, लेकिन-
पान करें ना वैष्णव जन
अरबों खरबों के आबंटन
दुर्जन गए डकार
बिना तुम्हारे नटवर नागर
कौन करे उद्धार

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