घनाक्षरी छन्द विधान

 आठ आठ तीन बार, और सात एक बार,

इकतीस अक्षरों का योग है घनाक्षरी ।

 

सोलह-पंद्रह पर, यति का विधान मान,

मंगल-करण, शुभ-योग है घनाक्षरी ।

 

अन्तिम अक्षर सदा, दीर्घ रखिये 'नवीन',

कविता जोगनिया का, जोग है घनाक्षरी ।

 

शायद ही कोई कवि, इसको न जानता हो,

छंदों में तो जैसे राज-भोग है घनाक्षरी ॥

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