नभ रोशन, अंतर्मन
रोशन, कण-कण है सुखदायी ।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद
पूर्णिमा आयी ।।
कुछ गरमी, कुछ
सर्दी जैसा,
मौसम लगे सुहाना ।
यही सार जीवन का प्यारे, सुख-दुःख
साथ निभाना ।
कष्टों की कलियों का सौरभ
होता है फलदायी ।।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
बम्ब-पटाखे, लड्डू-बर्फी, खील-बताशे
लाना ।
अगर कहीं हटरी मिल जाये, ला कर उसे सजाना ।
पीढ़ी दर पीढ़ी हटरी ही सुख सहेजती आयी ।।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
नये-नये
कपडे सिलवाना, करना साफ सफाई ।
घर के बड़े बुजुर्गों के सँग, पर्व मनाना भाई ।
जिसने भी खुश रखा बड़ों को, खुशी
उसी ने पायी ।।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
धनतेरस के दिन कुछ नूतन, घर
में ले कर आना ।
दीवाली को लक्ष्मी-पूजा कर के दीप जलाना ।
तदुपरान्त वह सब करना तुम रीति चली जो आयी ।।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
हाथ जोड़ फिर लक्ष्मी माँ से, यही
माँगना प्यारे ।
सब जग में जगमग हो जाये, दूर
होंय अँधियारे ।
नहीं भूलना उस संस्कृति को, जिसका
जग अनुयायी ।।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
अगर कहीं हटरी मिल जाये, ला कर उसे सजाना ।
पीढ़ी दर पीढ़ी हटरी ही सुख सहेजती आयी ।।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
घर के बड़े बुजुर्गों के सँग, पर्व मनाना भाई ।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
दीवाली को लक्ष्मी-पूजा कर के दीप जलाना ।
तदुपरान्त वह सब करना तुम रीति चली जो आयी ।।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।
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