नवगीत - छंदों के मतवाले हम

 छंदों के मतवाले हम
है प्यार हमें भाषाओं से
प्रारूपों के रखवाले हम
 
कहना सुनना
चिंतन सुमिरन
पढ़ना लिखना
अपना जीवन
तुलसी की धरती पर जन्मे
कबिरा के घरवाले हम
छंदों के मतवाले हम
 
बिम्ब हमारी
खास धरोहर
जोर हमारा
परिवर्तन पर
साहित की सेवा करने को
बैठे - लंगर डाले हम
छंदों के मतवाले हम

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