कुकर से गैस
रिस रही थी हौले-हौले
बीच-बीच में
सुनाई भी पड़ रही थी
सीटी की आवाज
उस की परिसीमाओं की आगाही
मगर सुना नहीं किसी ने
कुकर ने दी
एक और जोरदार सीटी
गूँजी उस की चीख
कि जैसे कह रहा हो वह
"वक्त हो चुका है.....
समाधान खोजो मेरा......
वरना फट जाऊँगा मैं.....
ध्वस्त कर डालूँगा तुम्हारी सारी साज-सज्जा.......
तुम्हारी काली करतूतों को......
विद्यमान कर दूँगा.....
तुम्हारे उजले कथानकों को
तुम्हारे मुखौटों पर.... चिन्ह रूप में......
मगर नहीं सुना .... किसी ने
भी नहीं सुना
और वही हुआ जो चेतावनी थी
उस आग पर तपते प्रेशर कुकर की
हाँ उसी की तो .... मजबूरियों की आग में झुलसते
जमाने की नजरों में फालतू
बेबस मजदूर की
बीच-बीच में
सुनाई भी पड़ रही थी
सीटी की आवाज
उस की परिसीमाओं की आगाही
मगर सुना नहीं किसी ने
एक और जोरदार सीटी
गूँजी उस की चीख
कि जैसे कह रहा हो वह
"वक्त हो चुका है.....
समाधान खोजो मेरा......
वरना फट जाऊँगा मैं.....
ध्वस्त कर डालूँगा तुम्हारी सारी साज-सज्जा.......
तुम्हारी काली करतूतों को......
तुम्हारे उजले कथानकों को
तुम्हारे मुखौटों पर.... चिन्ह रूप में......
और वही हुआ जो चेतावनी थी
उस आग पर तपते प्रेशर कुकर की
हाँ उसी की तो .... मजबूरियों की आग में झुलसते
जमाने की नजरों में फालतू
बेबस मजदूर की
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