नवीन सी चतुर्वेदी के कुण्डलिया छन्द

 कुण्डलिया छन्द विधान
कुण्डलिया जादू भराछन्द श्रेष्ठ श्रीमान 
दोहा रोला का मिलनहै इसकी पहिचान 
है इसकी पहिचान विषय का होना रोचक 
आदि-अंत सम-शब्दसाथ बनता विस्फोटक 
लल्ला चाहे औरचाहती इसको ललिया 
सब का है सिरमौर छन्दप्यारेकुण्डलिया 
 
जीते जी पूछें नहीं
जीते जी पूछें नहीं, चलें निगाहें फेर
आँख मूँदते ही मगर,  तारीफों के ढेर
तारीफों के ढेर, सुनाते अद्भुत किस्से
क्या सच है - क्या झूठ, कौन पूछे ये किस से
मृत्यु बाद सन्ताप - भला क्या सिद्ध करे जी
यदि है सच्चा प्यार - व्यक्त करिए जीते जी

राखी
बहना का अनुराग मय प्यार और मनुहार
धरे शीश पर  रहाराखी का त्यौहार
राखी का त्यौहारयार क्या कहने इस के
वो "राखी सरताज", बीस बहना हों जिस के
ठूँस-ठूँस तिरकोन मिठाई खाते रहना
फिर से आई यादहमें राखी  बहना 
 
सबसे पूर्व सगी-बड़ीबहना का अधिकार
उस के पीछे साब जीलाइन लगे अपार
लाइन लगे अपारतिलक लगवाते जाओ
गिन गिन के फिर नोटतुरंत थमाते जाओ
मॉड्रन डिवलपमेंटहुआ भारत में जब से
ये अनुपम आनंदछिन गयातब सेसब से
 
मॉड्रन परिवार
अक्सर ऐसे भी दिखें, कुछ मॉड्रन परिवार
मिल जुल कर ज्यों चल रही, गठबंधन सरकार
गठबंधन सरकार, सरोकारों के सौदे
अपने-अपने भिन्न, सभी के पास मसौदे
नित्य नया सा खेल, खेलते हैं ले-दे कर
दिखते संग, परंतु, दूर होते हैं अक्सर
 
पर्यावरण
दिया नदी ने विश्व को, खुशियों का संसार
लेकिन हम उसके लिये, बन बैठे दीवार
बन बैठे दीवार और फिर आगे बढ़ कर
सारा कचरा डाल दिया अमृत के अन्दर
कुदरत ने निष्पक्ष भाव से शमन कर दिया
बिगड़ा पाचन-तन्त्र नदी ने वमन कर दिया
 
सूखा, बाढ़, अकाल का, समझ सकें यदि मर्म
नियति नियन्ता नीतिगत, निभा रहे हैं धर्म
निभा रहे हैं धर्म, ध्येय भी बता  रहे हैं
तत्व-सन्तुलन ज्ञान संहिता पढ़ा रहे हैं
क्लीयर है सन्देश भले ही स्वर है रूखा
कुम्भकर्ण यदि बने झेलना होगा सूखा
 
है साधारण सी मगर, फिर भी बात विशेष
अब भी अवसर शेष है, यदि बन जाएँ महेश
यदि बन जाएँ महेश देश के कुछ ही बन्दे
सोच समझकर तनिक बदल दें अपने धन्धे
हरियाली का ओज चतुर्दिक छा सकता है
खुशहाली का दौर पलट कर आ सकता है
 
 
बचपन बारे ठाठ रईसी के दिन बीते
गरमी में अच्छे लगें, लीची, जामुन, आम
मिलता सूती वस्त्र से, काया को आराम
काया को आराम मिले तो मनवा डोले
ठण्डा ठण्डा पेय आतमा में रस घोले
सरबत, लस्सी, छाछ, सिकंजी, कन्द स-धर्मी
खरबूजे का पना पेट की सोखे गरमी
 
चंगी, काया को रखें , बैठक- दण्ड पचास
सन्ध्या, वन्दन और जप, मन में भरें हुलास
मन में भरें हुलास, दफा कर दें बीमारी
निद्रा, भोजन और योग की नीति हमारी
टेंटी, अदरक, लोंग, पुदीना, सौंफ झलंगी
इनका इस्तेमाल तबीयत रक्खे चंगी
 
दिन बीते पर आज भी, है इनसे अनुराग
फुलके मिस्से चून के, करकल्ले का साग
करकल्ले का साग, बना देता दीवाना
तोड़-तोड़ गाजर, मूली, बेरों का खाना
मन में बैठे राम कहें सुन री सुधि-सीते
बचपन वाले ठाठ रईसी के दिन बीते
 
टाइप रायटर
टकटक की आवाज अब, नहीं सुनेंगे कान
टाइप-राय्टर पा गया, यादों में स्थान
यादों में स्थान, बानगी देखो प्यारे
कम्प्यूटर का दौर, कुलाँचें भर-भर मारे
गोदरेज-बोयेस, और सहती भी कब तक
उसने आखिरकार , बंद करवा दी टकटक
 
दुनिया का दस्तूर
दुनिया का दस्तूर भी, लगता बड़ा  विचित्र
आज जिसे छूते नहीं, कल हो वही पवित्र
कल हो वही पवित्र, चित्र उस के लगवाते
महँगे-महँगे हार चढ़ा कर गाथा गाते
तारीफों के ढोल, बजाते मुन्ना-मुनिया
दुर्लभ रत्न समान, देखती उस को दुनिया
 
विकल्प-हीनता का संकट
है ही अब तो हर तरफ, दुनिया का ये हाल
जो दल में दल-दल करें, गले उन्हीं की दाल
गले उन्हीं की दाल, जिसे भर-भर कर कोसें
अन्दर अन्दर उसी तत्व को पालें-पोसें
यत्र-तत्र-सर्वत्र आज ये ही झंझट है
चारों ओर विकल्प-हीनता का संकट है
 
नया साल
टेंशन सारी छोड़ कर, बढ़िया करें विचार
बढ़िया पहनें-खायँ हम, बढ़िया हों व्यवहार
बढ़िया हों व्यवहार उचित आमद या खर्चे
बढ़िया हों उद्गार, करें सब बढ़िया चर्चे
बढ़िया मेल मिलाप होयँ बढ़िया ट्रांजेक्शन
बढ़िया हो नव-वर्ष, रहे ना कोई टेंशन
 
नीती में अंतर न हो, प्रीति बढ़े दिन रात
दुर्बल- निर्धन व्यक्ति पर, करें न हम आघात
करें न हम आघात, बात बस इतनी प्यारे
दम दम दमके चंद्र, साथ जब चमकें तारे
हिल मिल हम रह पायँ, भूल कर बातें बीती
औरों को बतलायँ - वही - जो पालें नीती
 
अभिव्यक्ति
व्यक्ती से बढ़ कर सदा, होता इस का मान
सब के सर चढ़ बोलती, इक नन्ही सी जान
इक नन्ही सी जान, शान से रहती हरदम
जो भी दिल में आय, बताती झट्ट फडक्दम
इस का मूल विवेक, शख्सियत इसकी शक्ती
कहना इस का काम, नाम इस का अभिव्यक्ती
 
एक्सक्यूज
हरदम ही देते रहें, ये या वो एक्स्क्यूज
ऐसे सज्जन-सज्जनी, करते हैं कन्‍फ्यूज
करते हैं कन्‍फ्यूज, पूजते दिखते जाहिर
लेकिन बनती बात बिगड़वाने में माहिर
वैसे गाने गाएँ, जहाँ, जैसा हो मौसम
फिर भी खासमखास, चहेते सबके हरदम
 
फेसबुक
हो जाते हैं एक सम , दीन और धनवान
जुकरबर्ग के मंच पर, सब हैं एक समान
सब हैं एक समान, तान सबकी तनती है
पर जो हो परफेक्ट, बात उसकी बनती है
अगर पोस्ट पर सिर्फ बार्टरी ही आते हैं
लाइक और कमेण्ट निरर्थक हो जाते हैं
 
दलबदलू
दिया जला कर कल तलक, थे जिस दल के अंग
गिरगिट बन कर अब उसे, दिखा रहे हैं रंग
दिखा रहे हैं रंग सियासत के मतवाले
सच में हैं ईमानदार लोगों के लाले
वज्रों पर भी घोर कुठाराघात कर दिया
छुटभैयों ने तवायफों को मात कर दिया
 
आय्पीयल
आय्पीयल [IPL] के खेल की बड़ी अनोखी रीत
सभी कमाते हैं यहाँ, हार मिले या जीत
हार मिले या जीत, भींत से मत्था मारूँ
धोनी-सचिन विरुद्ध, जभी युवराज निहारूँ
हाँ पर ये भी बात, माननी होगी निश्छल
गुमनामों के हेतु, श्रेष्ठ वर है आय्पीयल
 
नेताजी
नेताजी के देश में, ऐसी ऊहापोह
जिसको भी देखो उसे, है कुर्सी का मोह
है कुर्सी का मोह दिलों पर हावी ऐसे
अर्द्धनग्न अप्सरा नृत्य करती हो जैसे
पूछ रहे हैं लोग मगर हम बोलें क्या जी
लफ्फाजी का अर्थ हो गया है नेताजी
 
प्राचीन प्रारूप के कुण्डलिया छन्द
गये नन्द जू के भवन शिव शंकर भगवान
जसुमति से विनती करी, माइ दीजिये दान
माइ दीजिये दान खास हम हैं गुपाल के
कर के दरस निहाल हुए स्वामी त्रिकाल के
भूतनाथ कहने लगे, रतन-पिटारे खुल गये
दर्शन कर के लाल के भाग हमारे खुल गये
 
गया गाँठ से कुछ नहीं, तो भी बना सु-काम
बिना हरीफाई किये, अव्वल मिला इनाम
अव्वल मिला इनाम, काम सा काम किया तब
नश्वर जीवन नन्दलाल के नाम किया तब
नन्दनवन वाला सुमन, अन्तर्मन में खिल गया
गुरू कृपा की कोर से, जो माँगा सो मिल गया
 
ये अनुभव की बात है, अनुभव करें जरूर
सुमिरन करने मात्र से, लगे बरसने नूर
लगे बरसने नूर, हृदय जब आप बिराजें
संग झाँझ, मिरदंग, बाँसुरी के सुर बाजें
रस का सागर छोड़ कर, और कहीं क्यों जाइये
श्याम-श्याम रटते हुए, राधे-राधे गाइये

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