सम्पूर्ण वन्देमातरम का मूल राग में भावानुवाद (मूल पाठ सहित)

सम्पूर्ण वन्देमातरम का मूल राग में भावानुवाद
(भावानुवादक - नवीन सी. चतुर्वेदी)
 
1
वन्दे मातरम
सुजले सुफले शीतल मलय पवन
ओ हरी भरी मातु मम
वन्दे मातरम 
2
रात्रि बिखेरे चमचम चाँदनी
और धरती मह मह महक रही
सदा सुखी रसना है शहद सनी
सुख वर दात्री मातु मम
वन्दे मातरम
 
3
कोटि कोटि कण्ठ पल पल बखान सुनाएं
कोटि कोटि हुतात्मा बिछ बिछ जाएं
अबला है तू कौन कहे
बहुबल धारिणी नमामि तारिणी
रिपुदल वारिणी मातु मम
वन्दे मातरम
 
4
तू ही विद्या तू ही धर्म
तू ही हृदय तू ही मर्म
तू ही प्राण है तन भी
तू ही है बल बाँहों का
उर में तेरी ही भक्ति
तेरी ही प्रतिमा
मन्दिरों में स्थापित है माँ
वन्दे मातरम
 
5
तू ही दुर्गा
दस भुज आयुध हैं सजे
लक्ष्मी कमल पर विराजती
वाणी विद्या दायिनी तुझे नमन
नमामि कमले अमले अतुले
सुजले सुफले मातु मम
वन्दे मातरम
 
6
श्यामले सरले सुष्मिते भूषिते
धरणी भरणी मातु मम
वन्दे मातरम
 
 
 
मूल रचना
(रचयिता - श्री  बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय चटर्जी जी)
 
1
वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यशामलां मातरम् ।
2
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं
सुखदां वरदां मातरम् ।। वन्दे मातरम् ।
 
3
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले,
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले,
अबला केन मा एत बले ।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदलवारिणीं मातरम् ।। वन्दे मातरम् ।
 
4
तुमि विद्या, तुमि धर्म
तुमि हृदि, तुमि मर्म
त्वं हि प्राणा: शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे
मातरम् ।। वन्दे मातरम् ।
 
5
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
नमामि कमलां अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम् ।। वन्दे मातरम् ।
 
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां
धरणीं भरणीं मातरम् ।। वन्दे मातरम् ।
 
(श्री बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय जी द्वारा `वन्दे मातरम्’  राष्ट्रगीत
रविवार, कार्तिक शुद्ध नवमी, शके १७९७ (७ नोव्हेंबर १८७५) को सम्पूर्ण हुआ.)
 

No comments:

Post a Comment