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नवीन सी चतुर्वेदी के दोहे

प्रेम प्रीत के दोहे
 प्रीत न कोई युद्ध है, न ही हार या जीत
श्वास-श्वास विश्वास हो, तभी सफल है प्रीत
 
निर्गुण-सगुण विधान पर, मत कीजै तकरार
मुख पर दिखता है स्वयं, प्रेम तत्व साकार