प्रेम प्रीत के दोहे
प्रीत न कोई युद्ध है, न ही हार या जीत
श्वास-श्वास विश्वास हो, तभी सफल है प्रीत
निर्गुण-सगुण विधान पर, मत कीजै तकरार
मुख पर दिखता है स्वयं, प्रेम तत्व साकार
प्रीत न कोई युद्ध है, न ही हार या जीत
श्वास-श्वास विश्वास हो, तभी सफल है प्रीत
निर्गुण-सगुण विधान पर, मत कीजै तकरार
मुख पर दिखता है स्वयं, प्रेम तत्व साकार