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सम्पूर्ण वन्देमातरम का मूल राग में भावानुवाद (मूल पाठ सहित)

सम्पूर्ण वन्देमातरम का मूल राग में भावानुवाद
(भावानुवादक - नवीन सी. चतुर्वेदी)
 
1
वन्दे मातरम
सुजले सुफले शीतल मलय पवन
ओ हरी भरी मातु मम
वन्दे मातरम

गीत - राखी

 सम्बन्धों की परिभाषा है,
रिश्तों का गुणगान है राखी ।
अखिल विश्व में समरसता की,
सर्वश्रेष्ठ पहिचान है राखी ।।

गीत - पर्वों का पर्याय हिन्द है

 अगर ज़िन्दगी काया है तो उपटन हैं त्यौहार ।
शाश्वत जीवन दर्शन का अवगाहन हैं त्यौहार ॥

गीत - शरद पूर्णिमा

 नभ रोशन, अंतर्मन रोशन, कण-कण है सुखदायी ।
लिये सँदेशा दीवाली का, शरद पूर्णिमा आयी ।।

गीत - फिर हम क्यों लड़ते रहते हैं? जब किंचित भी क्लेश नहीं

 मुझको तुझसे रंज नहीं है, तुझको मुझसे द्वेष नहीं ।
फिर हम क्यों लड़ते रहते हैं? जब किंचित भी क्लेश नहीं ॥

गीत - चोट खा कर भी शराफत कर रहे हैं आदमी

 सच तो ये ही है इनायत कर रहे हैं आदमी ।
चोट खा कर भी शराफत कर रहे हैं आदमी ॥

गीत - दोष किस को दीजिये जवाबदार कोई नहीं

 लुट गये खजाने और गुन्हगार कोई नहीं ।
दोष किस को दीजिये जवाबदार कोई नहीं ॥

गीत - दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँ

 देश-गाँव-शहरों-कस्बों से अनुभव का हर पृष्ठ भरूँ ।
दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँ ॥

गीत - कोई तो जा के समझाये हमारे कर्णधारों को

 कोई तो जा के समझाये हमारे कर्णधारों को ।
चलो मिल कर भटकने से बचाएँ होनहारों को ॥

गीत - वो है भगवान इन्सान के रूप में

 एक शब्द अहसान है, एक शब्द उपकार ।
अहसाँ करते आदमी, प्रभू करें उपकार ॥

गीत - हिन्दी-उर्दू के झगड़ों में रोमन बाजी मार गयी

 तहजीबों के टकरावों में फैशन बाजी मार गयी ।
हिन्दी-उर्दू के झगड़ों में रोमन बाजी मार गयी ॥