काहु कों बाँध्यौ नहीं जग आपु हि प्रीत की डोर सों आय बँध्यौ है
हाथ’न हाथ खरीदौ गयौ चितचोर
सखी बिन मोल बिक्यौ है
नित्य नवीन विधी हिय हार सनेहि’न कौ मन जीत लयौ है
कारे पै काहू कौ रंग चढ्यौ नहिं कारे के रंग’न विश्व रँग्यौ है
नित्य नवीन विधी हिय हार सनेहि’न कौ मन जीत लयौ है
कारे पै काहू कौ रंग चढ्यौ नहिं कारे के रंग’न विश्व रँग्यौ है