ज्योति जला
जगमग.............
बाल-अबाल हृदय हरषाया
नर-नारी सब चहक रहे हैं
बन के नभ के खग...............
ज्योति जला जगमग
बम्ब, पटाखे - खुल्लमखुल्ला
हर दुकान पर भाँति भाँति के
सजे हुए हैं नग.............
ज्योति जला जगमग
सुख-दुख का मेला है जीवन
ध्यान रहे जब कष्ट पड़े तो
कदम न हों डगमग................
ज्योति जला जगमग
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