गीत-नवगीत, सॉनेट, कविताएं, छन्द एवं मुक्तक आदि
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नवगीत
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नवगीत
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नवगीत - मजदूरी का मोल
मजदूरी का मोल
यहाँ अधिक
,
पर
वहाँ लगे कम
ये कैसा है झोल
ओ भैया ये कैसा है झोल
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नवगीत - यमुना कहे पुकार
यमुना कहे पुकार
बिना तुम्हारे नटवर नागर
कौन करे उद्धार
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नवगीत - छंदों के मतवाले हम
छंदों के मतवाले हम
है प्यार हमें भाषाओं से
प्रारूपों के रखवाले हम
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नवगीत - आप हम सब खुश रहें
खेत खलिहानों में
पैदावार हो
,
हसरतों का ना कहीं
व्यापार हो
,
बाल बच्चों को मिले
शिक्षा अमित
,
बहन बेटी घूम पाएँ
भय रहित
,
हो तरक्की और नदियाँ भी बहें ।
आप हम सब खुश रहें ॥
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नवगीत - ज्योति जला जगमग
ज्योति जला जगमग.............
पर्व प्रकाश पुंज का आया
बाल-अबाल हृदय हरषाया
नर-नारी सब चहक रहे हैं
बन के नभ के खग...............
ज्योति जला जगमग
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नवगीत – दीपावली दीपावली दीपावली
हर साल मेरी रूह को
,
कर डालती है बावली ।
दीपावली दीपावली दीपावली ॥
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नवगीत – सड़क पर
चलें रीति से
नीति निभाते
मीत सड़क पर
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नवगीत - आज के यही समाचार हैं
द्वंद-द्वेष-दुख दुराचार हैं
भाँति भाँति के हहाकार हैं
आज के यही समाचार हैं
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नवगीत - चल चलें इक राह नूतन
चल चलें इक राह नूतन
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नवगीत - लुप्त हों न पलाश
बिन तुम्हारे होलिका त्यौहार
था इक कल्पना भर
हाट में बाकायदा
तुम स्थान पाते थे बराबर
अब कहाँ वे रंग
वे रंगीन भू-आकाश
लुप्त हों न पलाश
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