जहाँ-जहाँ
जाइयेगा वहाँ-वहाँ पाइयेगा,
दुनिया में ठौर-ठौर इनके निशान हैं ।
मानवीय-सभ्यता
के प्रहरी समान नित्य,
बेटी को सिखाते दहलीज़ के
विधान हैं ।।
पालते हैं, पोसते हैं, पलकों
पै रखते हैं,
और फिर एक दिन कर देते दान
हैं ।
ख़ुद को बुझा के पर घर में
भरें उजास,
बेटियों के माता पिता सच में
महान हैं ।।
सुनते हैं कर्ण जैसा दानवीर
कोई नहीं,
किन्तु वस्तु दान देना कौन
सा महान है ।
सुनते हैं राजा बलि जैसा
महादानी नहीं,
हाँ,
परन्तु, भूमिदान,
निम्न-प्रतिमान है ।
अंगदान है महान इसमें दो राय
नहीं,
किन्तु उससे भी श्रेष्ठ एक
और दान है ।
जीते जी कलेज़े को निकालना
मज़ाक़ नहीं,
अंगदान से भी श्रेष्ठ-दान
कन्यादान है ।।
No comments:
Post a Comment