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नवीन सी चतुर्वेदी के कुण्डलिया छन्द

 कुण्डलिया छन्द विधान
कुण्डलिया जादू भराछन्द श्रेष्ठ श्रीमान 
दोहा रोला का मिलनहै इसकी पहिचान 
है इसकी पहिचान विषय का होना रोचक 
आदि-अंत सम-शब्दसाथ बनता विस्फोटक 
लल्ला चाहे औरचाहती इसको ललिया 
सब का है सिरमौर छन्दप्यारेकुण्डलिया 

छन्द - सत्तर-अस्सी के दशक वाली होली

कहाँ गईं वे मस्तियाँ, कहाँ गई वह मौज
वे केशर की क्यारियाँ, गोबर वाले हौज
गोबर वाले हौज बीच डुबकी लगवाना
मेसू, मठरी, खीर’मोन के थाल उड़ाना
बतला तो ऐ यार जमाने कहाँ गईं वे