नवगीत - आज के यही समाचार हैं

 द्वंद-द्वेष-दुख दुराचार हैं
भाँति भाँति के हहाकार हैं
आज के यही समाचार हैं
 
वोट दे रहे औ ठगा रहे
टेक्स भर रहे, कष्ट पा रहे
लीडरान से मात खा रहे
यूँ लगे कि ज्यूँ गुन्‍हगार हैं
आज के यही समाचार हैं
 
रौबदार सब कोट-टाइयाँ
लोकतंत्र की दे दुहाइयाँ
गल्फ में लड़ाते लड़ाइयाँ
निम्न, तेल से, रक्त-धार हैं
आज के यही समाचार हैं
 
डिग्रियाँ बनीं फाँस कंठ की
आज सब सुनें बात संठ की
लुप्त हो रही जाति लंठ की
सुप्तप्राय से सरोकार हैं
आज के यही समाचार हैं

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