गीत-नवगीत, सॉनेट, कविताएं, छन्द एवं मुक्तक आदि
Showing posts with label
आदर्श
.
Show all posts
Showing posts with label
आदर्श
.
Show all posts
गीत - चोट खा कर भी शराफत कर रहे हैं आदमी
सच तो ये ही है इनायत कर रहे हैं आदमी ।
चोट खा कर भी शराफत कर रहे हैं आदमी ॥
Read more »
गीत - दोष किस को दीजिये जवाबदार कोई नहीं
लुट गये खजाने और गुन्हगार कोई नहीं ।
दोष किस को दीजिये जवाबदार कोई नहीं ॥
Read more »
गीत - कोई तो जा के समझाये हमारे कर्णधारों को
कोई तो जा के समझाये हमारे कर्णधारों को ।
चलो मिल कर भटकने से बचाएँ होनहारों को ॥
Read more »
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)