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गीत - चोट खा कर भी शराफत कर रहे हैं आदमी

 सच तो ये ही है इनायत कर रहे हैं आदमी ।
चोट खा कर भी शराफत कर रहे हैं आदमी ॥

गीत - दोष किस को दीजिये जवाबदार कोई नहीं

 लुट गये खजाने और गुन्हगार कोई नहीं ।
दोष किस को दीजिये जवाबदार कोई नहीं ॥

गीत - कोई तो जा के समझाये हमारे कर्णधारों को

 कोई तो जा के समझाये हमारे कर्णधारों को ।
चलो मिल कर भटकने से बचाएँ होनहारों को ॥