गीत-नवगीत, सॉनेट, कविताएं, छन्द एवं मुक्तक आदि
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सौहार्द
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गीत - फिर हम क्यों लड़ते रहते हैं? जब किंचित भी क्लेश नहीं
मुझको तुझसे रंज नहीं है
,
तुझको मुझसे द्वेष नहीं ।
फिर हम क्यों लड़ते रहते हैं
?
जब किंचित भी क्लेश नहीं ॥
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