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गीत - फिर हम क्यों लड़ते रहते हैं? जब किंचित भी क्लेश नहीं

 मुझको तुझसे रंज नहीं है, तुझको मुझसे द्वेष नहीं ।
फिर हम क्यों लड़ते रहते हैं? जब किंचित भी क्लेश नहीं ॥

गीत - चोट खा कर भी शराफत कर रहे हैं आदमी

 सच तो ये ही है इनायत कर रहे हैं आदमी ।
चोट खा कर भी शराफत कर रहे हैं आदमी ॥